MP LPG Cylinder New Rules 2026: मध्य प्रदेश में गैस सिलेंडर पर नया कोटा लागू, जानें पूरी जानकारी

 मध्य प्रदेश में LPG सिलेंडर वितरण के नए नियम: क्या बदला और किसे कितना मिलेगा?


भोपाल | 24 मार्च 2026

मध्य प्रदेश सरकार ने गैस सिलेंडर की कमी को देखते हुए एक अहम फैसला लिया है। अब राज्य में एलपीजी सिलेंडर वितरण के लिए नई गाइडलाइन लागू की गई है, जिससे जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता दी जा सके और आम लोगों को परेशानी न हो।

🔶 घरेलू उपभोक्ताओं को राहत

सरकार ने साफ किया है कि घरेलू गैस उपभोक्ताओं को पहले की तरह 100% सप्लाई मिलती रहेगी। यानी घरों में गैस की उपलब्धता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

🔶 किन सेक्टर को कितनी सप्लाई मिलेगी?

नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग क्षेत्रों के लिए गैस का कोटा तय किया गया है:

शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र: 30%
सुरक्षा एजेंसियां, पुलिस, रेलवे, एयरपोर्ट, जेल आदि: 35%
होटल और रेस्टोरेंट: 9% + 9%
ढाबा और स्ट्रीट फूड विक्रेता: 7%
 फार्मा, फूड प्रोसेसिंग, पोल्ट्री और बीज उद्योग: 5%
 अन्य उद्योग: 5%

सरकार का मानना है कि इस बंटवारे से सभी जरूरी सेक्टर की जरूरतें पूरी हो सकेंगी।

🔶 सख्त निगरानी और कार्रवाई

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के उप सचिव बी.के. चंदेल ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि:

नियमित निरीक्षण किया जाए

जमाखोरी और कालाबाजारी रोकी जाए

नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए

यह कार्रवाई आवश्यक वस्तु अधिनियम और अन्य कानूनों के तहत होगी।

🔶 वैकल्पिक ऊर्जा अपनाने की सलाह

सरकार ने संस्थानों और व्यापारियों से अपील की है कि वे अस्थायी रूप से वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों (जैसे इलेक्ट्रिक या बायोगैस) का इस्तेमाल करें, ताकि गैस की उपलब्धता संतुलित बनी रहे।

🔶 व्यापारियों की बढ़ती चिंता

राजधानी भोपाल सहित कई जिलों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी अभी भी बनी हुई है।

इसका असर खासकर:

होटल

रेस्टोरेंट

छोटे ढाबा संचालक

पर पड़ रहा है। कई व्यापारियों का कहना है कि अगर जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो उनका कारोबार प्रभावित हो सकता है।

🔶 कब तक लागू रहेगा नियम?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नई व्यवस्था अगले आदेश तक लागू रहेगी। इसका उद्देश्य जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता देना और गैस सप्लाई सिस्टम को संतुलित बनाए रखना है।

📌 निष्कर्ष

नई गाइडलाइन से जहां घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिली है, वहीं व्यापारिक क्षेत्रों में चिंता बनी हुई है। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार की यह रणनीति गैस संकट को कितनी जल्दी सामान्य कर पाती है।

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