लोकसभा में 360 के आंकड़े से अभी भी दूर NDA, सीटें बढ़ाने के कई विकल्पों पर मंथन
केंद्र सरकार लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की दिशा में आगे की रणनीति तैयार कर रही है। इसी क्रम में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करने से जुड़े कई प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी किसी भी प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
543 सदस्यीय लोकसभा में किसी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए कम से कम 360 सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है। वर्तमान में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास लगभग 300 सांसदों का समर्थन है, इसलिए उसे अभी भी दो-तिहाई बहुमत से काफी दूरी तय करनी है।
सीटें बढ़ाने पर विचार क्यों?
सूत्रों के अनुसार, सरकार ऐसा मॉडल तलाश रही है जिससे लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाई जा सके और राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन भी बना रहे। विशेष रूप से दक्षिण भारत के राज्यों की यह चिंता है कि केवल जनसंख्या के आधार पर होने वाले परिसीमन से उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी घट सकती है।
इसी वजह से एक प्रस्ताव यह भी है कि सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या समान अनुपात में बढ़ाई जाए, ताकि मौजूदा प्रतिनिधित्व का संतुलन काफी हद तक बरकरार रहे।
पुराने अनुपात को बनाए रखने का सुझाव
विचाराधीन प्रस्तावों में 1971 की जनगणना के आधार पर राज्यों के बीच सीटों का वर्तमान अनुपात बनाए रखने का विकल्प भी शामिल है। वहीं, भविष्य में सीटों का पुनर्निर्धारण 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जा सकता है, क्योंकि नई जनगणना के अंतिम आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं।
महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी
सरकार का लक्ष्य महिला आरक्षण कानून को 2029 के आम चुनाव से पहले लागू करना बताया जा रहा है। इसके लिए लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने जैसे विकल्पों पर भी चर्चा चल रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित होंगी और समय-समय पर आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों का रोटेशन भी किया जाएगा।
अभी अंतिम फैसला बाकी
सरकारी सूत्रों का कहना है कि इन सभी प्रस्तावों पर अभी विचार-विमर्श जारी है। अंतिम निर्णय लेने के बाद ही संबंधित संविधान संशोधन विधेयक संसद में लाया जाएगा। सरकार पहले यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उसे आवश्यक समर्थन प्राप्त हो, ताकि विधेयक पारित कराने में कोई बाधा न आए।
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